चक्रवात किसे कहते हैं? चक्रवात के क्या प्रभाव है?

गर्म हवाएं और ठंडी हवाएं विपरीत दिशा से आती हैं और एक दूसरे से मिलती हैं। तो एक चक्र शुरू होता है, यानी एक गोलाकार हवा का निर्माण होता है, जिसे चक्रवात कहते है।

इस गोलाकार हवा के बीच में कम दबाव और बाहर की तरफ एक उच्च दबाव होता है।

ये चक्रवाती हवाएं बाहर से अंदर की ओर चलती हैं, बाहर से अंदर की ओर आने वाली चक्रवाती हवाओं का केंद्र होता है।

यह इतना विनाशकारी है कि पेड़, पौधे, बड़े घर इसमें गिर जाते हैं, और जानवरों, जानवरों, पक्षियों और मनुष्यों को बहुत नुकसान होता है।

इसमें कई लोगों की मौत भी हो जाती है और कई जानवर भी अपनी जान गंवा देते हैं।

चक्रवात को अलग-अलग देशों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है।

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चक्रवात

विभिन्न देशों चक्रवात का नाम

जैसा कि इसे हिंद महासागर में चक्रवात, चीन सागर में टाइफून, मैक्सिको की खाड़ी में टारनेडो, अटलांटिक महासागर में हरिकेन, पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में विली-विली और साइक्लोन के रूप में जाना जाता है।

इसका आकार अंग्रेजी के V अक्षर जैसा होता है।

चक्रवात की चलने की दिशा

दक्षिणी गोलार्द्ध में इसकी चलने की दिशा घडी की सुईयों की दिशा में (क्लॉकवाइज) है और उत्तरी गोलार्द्ध में चक्रवात की दिशा घड़ी की सुईयों के विपरीत (एंटी क्लॉकवाइज) होती है।

चक्रवात की गति

इसकी अधिकतम गति 30 से 300 किलोमीटर प्रति घंटा हो सकती है।

तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोग इस आपदा से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं, इसका सीधा प्रभाव मछुआरों और तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों पर पड़ता है।

इस आपदा के आने से पहले, सरकार पहले ही तटीय इलाकों में लोगों को तट से दूर रहने के लिए चेतावनी देती है और एनडीआरएफ की टीम यहां उपलब्ध कराई जाती है।

इससे सुरक्षा के लिए, राज्य सरकार और केंद्र सरकार हर संभव सुरक्षा प्रदान करती है।

जिसके कारण जान-माल का नुकसान कम होता है।

हमारे देश को हर साल चक्रवातों की समस्या से भी जूझना पड़ता है।

चक्रवातों के प्रकार

चक्रवात छह प्रकार के होते हैं।

अतिरिक्त उष्णकटिबंधीय चक्रवात
उष्णकटिबंधीय
इंटरट्रॉपिकल
ध्रुवीय कम
ध्रुवीय
मेसो

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चक्रवात का नाम

अगर आप इसके नाम के बारे में सुनते हैं, तो आपको इसका नाम बहुत ही अजीब लगता होगा।। लेकिन क्या आप जानते हैं कि

भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, चक्रवातों के 160 से अधिक नाम बनाए गए हैं।

चक्रवात के प्रभाव

चक्रवात के बहुत ही हानिकारक तथा विनाशकारी प्रभाव होते है।

(1) चक्रवात में तेज हवा के साथ साथ बारिश भी होती है जिससे पेड़ पौधे तथा मकान गिर जाते है।

(2) इससे फसलें बर्बाद हो जाती है।

(3) इससे संचार व्यवस्था में बाधा आती है।

(4) तेज हवा कारण सड़क पर पेड़ गिर जाते है। जिससे यातायात में दुविधा होती है।

(5) चक्रवात के कारण बिजली के खम्भे गिर जाते है और लोगो को दिक्कत का सामना करना पड़ता है।

(6) इससे सभी को सतर्क रहना चाहिए। क्योकि इसकी चपेट में आने से जान भी जा सकती है।

यह एक बहुत ही विनाशकारी प्राकृतिक आपदा है। अगर आप तटीय क्षेत्रो में निवास करते है तो इससे आपको सावधान रहना चाहिए। तथा समय समय पर मौसम विभाग की जानकारी को ध्यान में रखना चाहिए।

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