फिरोज खान (Feroz Khan) कौन थे? फिरोज खान की जीवनी हिंदी में।

फिरोज खान कौन थे? (Who was Feroz Khan?)

75 के दशक में हिट फिल्म देने वाले बॉलीवुड के दिग्गज तथा महान अभिनेता फिरोज खान (feroz khan) का जन्म 25 सितंबर 1939 को बेंगलुरु में हुआ था।

इनकी प्रारंभिक शिक्षा भी बैंगलोर में पूरी हुई।

इनके पिता अफगानिस्तान के पठान थे, उनका नाम सादिक अली खान धनौली था।

फिरोज खान की माता (feroz khan mother name) का नाम फातिमा खान था। वह एक ईरानी महिला थी।

इनके पांच भाई थे- संजय खान, शाहरुख खान, अली खान, समीर खान और अकबर खान

इनकी दो बहने भी थी। खुर्शीद सनावर, दिलशाद बेगम सेख।

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फिरोज खान सबसे बड़े थे। और बहुत ही सुन्दर थे।

सन 1965 में फिरोज खान ने सुंदरी खान से शादी कर ली। तथा इनके दो बच्चे हुए बेटी लैला खान और बेटा फरदीन खान।

फिरोज खान और सुंदरी खान की शादी 20 साल के बाद नही चल सकी। और दोनों ने 1950 में तलाक ले लिया।

शुरुआती शिक्षा प्राप्त करने के बाद पढ़ाई के सिलसिले में मुंबई आ गए तथा ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई इन्होंने मुंबई में ही पूरी किया।

बचपन से ही कलाबाजी में मशहूर थे। अपने स्कूल में करतब दिखाया करते थे।

और फिल्मो के डायलाक एक अलग ही अंदाज में बोला करते थे, मानों जैसे सच में कोई अभिनेता अभिनय कर रहा हो।

फिरोज खान का फिल्मी सफर (Feroz Khan’s film journey)

सबसे पहले 1960 में इन्हें फिल्म दीदी में अभिनय करने के लिए एक छोटा सा किरदार मिला।

लेकिन इनकी यह पहली फ़िल्म फ्लॉप साबित हुई। शुरुआत में इन्हें कम बजट वाली फिल्में मिलती थी जैसे रिपोर्टर राजू, सैमसंग, चार दरवेश, एक सपेरा एक लुटेरा ,सीआईडी 909 आदि फिल्मे मिली।

इन्होंने बॉलीवुड की फिल्मों का नजरिया ही बदल दिया, फिल्मों में हीरोइन के कपड़े पहनने से लेकर एक्शन सीन तक को इन्होंने दूसरी दिशा में लेकर चले गए।

इनकी फिल्मो में आज की तरह खतरनाक स्टंट तथा कारे होती थी। शुरुआत में इन्हें साइड हीरो का किरदार मिलता था

यह लीड रोल में नहीं दिखे तथा फ़िरोज़ खान (feroz khan) मुख्य किरदार के रूप में काम करना चाहते थे।

फिल्म ऊंचे लोग से कामयाबी का सफर शुरू

लेकिन सन 1965 में आई फिल्म “ऊँचे लोग” इन्हें कामयाबी के शिखर पर पहुंचा दिया।

इस फिल्म को फानी मजूमदार ने बनाया था।

फिल्म ऊँचे लोग के लिए इन्हें खूब सराहा गया। चारो तरफ इनकी खूब चर्चा होने लगी।

इस फिल्म में दो और महान कलाकार थे राजकुमार और अशोक कुमार (दादा मुनी)।

उसी साल फिल्म आरजू भी आयी और एक के बाद एक फिल्में हिट होती गई और इन्हें कामयाबी के शिखर पर पहुंचा दिया।

फिल्म सफर, आदमी और इंसान जैसी फिल्में ने इनकी लोकप्रियता बढ़ा दी। अब इनको बहुत पसंद किया जाने लगा।

लेकिन फिल्मों में लीड रोल ना मिलने की वजह से यह हताश थे। इसलिए उन्होंने निर्देशन करने का निर्णय लिया।

सन 1971 में फिल्मो के प्रोड्यूसर और डिटेक्टर बन गये।

यह जानते थे कि वह खुद के निर्देशन में लीड रोल कर सकते हैं इसलिए उन्होंने फिल्म का निर्देशन करना शुरू कर दिया।

उनकी पहली बनाई फिल्म अपराध से इनकी लोकप्रियता एकदम बढ़ गई सन 1975 में आए धर्मात्मा फिल्म इनके जीवन मे मिल का पत्थर साबित हुई।

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फिरोज खान की सभी फिल्में (All movies by Feroz Khan)


दीदी 1960, घर की लाज 1960, मैं शादी करने चला 1962, रिपोर्टर आज 1962, टार्जन गोस टू इंडिया 1962, बहुरानी 1963,

चार दरवेश 1964, सुहागन 1964, सैमसन 1964, आरजू 15 जून 1965, तीसरा कौन 1965, ऊंचे लोग 19 अगस्त 1965,

एक सपेरा एक लुटेरा 1965, तस्वीर 1966, 100 साल बाद 1966, मैं वही हूं 1966, वह कोई और होगा 1967,

रात और दिन 1967, सीआईडी 909 1967, रात अंधेरी थी 1967, नादिर शाह 1967, औरत 1967, आग 1967,

आजा सनम 1968, अंजाम 1968, प्यासी शाम 1968, अनजान 1969, जानवर और इंसान 8 अगस्त 1969,

सफर 1970, मेला 1971, एक पहेली 1971, उपासना 15 मार्च 1971, अपराध 1972, कशमकश 1972,

किसान और भगवान 1974, गीता मेरा नाम 24 मार्च 1974, खोटे सिक्के 29 मार्च 1974, भगत धन्ना जट्ट,

अनजान रहे 1974, इंटरनेशनल 1974, रानी और लालपरी 6 अगस्त 1975, काला सोना 1975, धर्मात्मा 1975,

शराफत छोड़ दी मैंने 30 अगस्त 1976, कबीला 1976, शंकर शंभू 1976, नागिन 23 जनवरी 1976,

जादू टोना 1977, दरिंदा 1977, चुनौती 1980, कुर्बानी 1981,

लहू पुकारेगा 1980, खून और पानी 1981, कच्चे हीरे 1982, जंगबाज 1982, दो वक्त की रोटी 1988, दयावान 1988,

मीत मेरे मन का 1991, यलगार 1992, जानसी 2003, एक खिलाड़ी एक हसीना 2005, ओम शांति ओम 2007, वेलकम 2007.

वेलकम फिरोज खान (feroz khan) आखिरी फिल्म थी, जो सुपरहिट साबित हुई।

फिरोज खान का आखिरी सफर (Feroz Khan’s last journey)

फिरोज खान (feroz khan) की मृत्यु 27 अप्रैल 2009 में 69 वर्ष की उम्र में हो गई.

एलन के कैंसर से पीड़ित थे इसी वजह से इतनी कम उम्र में ही परलोक सिधार गए

लेकिन जाते-जाते इन्होंने फिल्मी दुनिया का नजरिया ही बदल दिया इसलिए आज भी फिरोज खान को याद किया जाता है.

फिरोज खान (feroz khan) को जाने से बॉलीवुड को बहुत ही बड़ा झटका लगा।

भारतीय सिनेमा जगत में अपना बेशकीमती सितारा खो दिया।

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